Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2022

आनंदित रहने का रहस्य

  How are you today? यह औपचारिकता वाला प्रश्न नहीं है , आप ने गहराई से सोचना हैं कि मेरे मन में, आज क्या चल रहा हैं? क्या मै परेशान हूँ या शांत? क्या मै खुश हूँ? यदि हाँ, तो अब मै पहले के समान प्रफुल्लित क्यों नहीं होता?      जैसे छुट्टियों के पहले स्कूल से घर आते वक़्त होता था,  या       अपने माता पिता या बच्चों को खुश देखकर सुकून पाता था? वैसा गहरा अनुभव, जो अंतर्मन तक सुख देता था. क्या उसे मै फिर से जी सकता हूँ? ईश्वर को नमन करके आज 3 ऐसी बातें ढूंढते है, जिनके लिए हम कृतज्ञ है. यह कुछ भी हो सकता है, जो भी हमें सुख दे रहे हो, जैसे: हमारे पास जो सुविधाएं है,  स्वास्थ्य है,  रिश्ते है,  व्यवसाय में जो उन्नति है वगैरह इस बारे में सोचिये या लिख लीजिये, अपनी diary में,  यह आपके लिए, एक exercise है, जो रोज करनी है, okay. ईश्वर के हर फैसले पे खुश रहो, क्योंकि, “ईश्वर वो नहीं देता, जो आपको अच्छा लगता है” बल्कि, “ईश्वर वो देता है, जो आपके लिए अच्छा होता है। —  — कृतज्ञता खुशियाँ पाने की सीढ़ी है . मेरा मन स्वाधीन खुशहाल, Swaa...

मेरा मन स्वाधीन, खुशहाल

  शांत मन निरोगी काया, मेरी जिम्मेदारी क्या कभी आपने कोई कार्य पूरे मन व दुलार से अपनों के लिए किया है? कार्य कोई भी हो,भले ही कुछ सफाई की हो, परन्तु सात्विक भाव का महत्व है.  क्या आज भी उस दिन को याद कर आप को सच्ची ख़ुशी व सुकून नहीं मिलता? जी हाँ यह आत्मिक सुख का एक रास्ता है 🙏 जब दूसरे के कष्ट में आप को तकलीफ होती हैं और  आप उसके भले के लिए कई बार सोचते हैं,  तब आप ईश्वर के गुण धारण करते हैं , इसलिए स्वयं को एक अच्छा इंसान कह सकते हैं. जब दूसरे व्यक्ति को परेशां जानकर आप आगे बढ़कर मदद करते है,  बिना ज्यादा सोचे, स्वयं के पास कितना है , बिना कुछ हिसाब लगाए , क्या तब आपको करुणा व् गहरी शांति नहीं मिलती ?  ऐसी सोच व व्यव्यहार के लिए स्वयं को सराहना तो बनता है . क्या आपको बुरा लगता है जब लोग आपको उचित श्रेय नहीं देते , आपकी अच्छाई को नज़रअंदाज़ कर के कुछ दोष देने लगते हैं ?  परन्तु क्या आप अपने साथ , खुद भी यही नहीं करते ?  आप स्वयं, कोई गलती होने पर, मन में अपनी बुराई करते हैं, बार बार दोहराते और कई महीने तक दोष देते रहते हैं,  इसीलिए तो दूसरे भ...